Thursday, January 8, 2015





कलम से ____

दरिया का शोर, झील सा ठहराव, दौर ए मौज़
क्या क्या न देखा, तेरी आँखों की गहराइयों में !!!

©सुरेंद्रपालसिंह 2015



कलम से____

जिन्दगी रिवाइंड मोड में
करने को कुछ है नहीं
बैठे बैठे सोचते रहते हैं
पहुँच बचपन में जो गये
याद आता है, वो वाकया
रेल थी बढ़ती हुई
ड़ोर आस की टूटती हुई
पेड़ पौधे पीछे छोड़ती हुई

सफर खत्म होने का
नाम लेता था नहीं
दून घाटी, देहरादून
कर रहा था इंतजार
कोई वहाँ,
सांस टूटती हुई
गिनती उल्टी गिनती हुई
थी दाँव पर जिन्दगी
माँ की.....

©सुरेंद्रपालसिंह 2015
http://spsinghamaur.blogspot.in/

कलम से___

पता नहीं कहाँ तलक पहूँची है
मेरी फरियाद,
तुमने महसूस कर ली 
मेरे लिए इतना ही काफी है ......

©सुरेंद्रपालसिंह 2015
कलम से____

सर्द हवाओं का जोर है
बारिश भी नहीं है
थम रही
लिखा था कागज़ पर जो
चस्पा कर दिया है
लोगों ने दीवार पर....

फिर दूर क्यों हो तुम
पास आओ तो जरा
गर्म सासों का एहसास
कराओ तो जरा
सर्द रातों में
बुझते चरागों को
जलाओ तो जरा.....

©सुरेंद्रपालसिंह 2015
http://spsinghamaur.blogspot.in/
 
कलम से____

जब भी मिली मुझे अल्हड सी दिखी
कभी तू चर्च में थी
कभी सजदे में थी
न तू उसके बस में थी
न तू मेरे बस की थी
तू अपने ही मन की थी
इसी वज़ह तू मुझे बेहद पसंद थी !!!

©सुरेंद्रपालसिंह 2015
http://spsinghamaur.blogspot.in/


कलम से____
सोचा ना था कभी
ऐसी दोस्ती होगी
मेरे आप जैसे 
लोगों की हस्ती होगी
जन्नत की गलियों के
ख्वाब क्यूँ देखूँ
जब रोज़ होते हैं
रूबरू आपसे से......
©सुरेंद्रपालसिंह 2015
http://spsinghamaur.blogspot.in/

वियोगी होगा पहला कवि आह से उपजा होगा गान

If any one can help me get complete poem from "Pallav" / "पल्लव" book.
Thanks in advance.
"वियोगी होगा पहला कवि
आह से उपजा होगा गान
निकल कर नयनों से चुपचाप
बही होगी कविता अनजान
~ सुमित्रानंदन पन्त"
— with Aloke Ghosh and Puneet Chowdhary.
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