Tuesday, May 5, 2015

एक दिन और हुआ तमाम किसको है किसका इंतजार....

कलम से_____

एक दिन और 
हुआ तमाम
किसको है किसका

इंतजार....


©सुरेंद्रपालसिंह 2015

सूर्यास्त कल का बहुत कुछ कह गया


सूर्यास्त कल का बहुत कुछ कह गया


कलम से_____

सूर्यास्त
कल का बहुत कुछ
कह गया
बादल फिर
धिरने लगे
बेमौसम मार सहते सहते
खेत खलिहान चौपट हुये
आस का दीपक
भी बुझ गया
विश्वास अब
तुझसे भी उठ गया
मैं जीते जी टूट गया।

©सुरेंद्रपालसिंह 2015
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भूल न जाना शहीदों को चैन की नींद सो रहा है वहाँ कोई।




कलम से ____

जान हो तुम मेरी कह गया कोई
मर गया तन्हा इंतजार में कोई।

बयां कर न पाऊँगा उस सैर की बानी
मिले न चैन बहार में अब कोई।

आ गया हूँ छोड़कर अपनी दुनियां
पिला दे जाम साकिया अब कोई।

जिक्र उस रात का क्या करूँ मैं
सिर रखके तेरी गोद में सो गया कोई।

भूल न जाना शहीदों को
चैन की नींद सो रहा है वहाँ कोई।

©सुरेंद्रपालसिंह 2015
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हर आहट पर लगता है तुम आ गये.......

हर आहट पर लगता है
तुम आ गये.......





कलम से____

मेरी एक तस्वीर
बहुत पहले जो तुमने 
कैनवस पर उतारी थी
मेरी जिंदगी में जब
दाखिल तुम हुये थे
आड़ी-तिरछी चंद लकीरों
को सलीके से लगा कर
पूरी करी थी,
मुझे आज अधूरी सी लगी
रुक न पाई मैं,
ब्रश उठ गया अचानक
बस एक रंग की
कमी सी लगी
रंग वो मैंने
भर दिए हैं,
तस्वीर की मांग में !

अब बस इंतजार है
तुम्हारे आने भर का
हर आहट पर लगता है
तुम आ गये.......

©सुरेंद्रपालसिंह 2015
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फूलों पर बहार कुछ ही दिनों की है





कलम से____

फूलों पर बहार कुछ ही दिनों की है
मेरा बजूद बस इन्हीं की जरूरत है
ज़माने ने तो भुला ही दिया है... See More
 — with Puneet Chowdhary.

पतझड के बाद, नई कोपलें मन को भाने लगीं है,


पतझड के बाद,
नई कोपलें मन को भाने लगीं है,






कलम से ........

पतझड के बाद,
नई कोपलें मन को भाने लगीं है,
पेड़ों पर रंगत आने लगी है,

अगंड़ाई मौसम लेने लगा है
दुपहरिया गरम अब होने लगी है,
हवाओं का रुख भी बदलने लगा है,
न बदला और न बदलेगा,
बस एक उनका रुख,
उम्मीदेवफा कायम है अभी
वो सुबह फिर आयेगी
तू लौट फिर एक दिन आयेगी
यादों को नया जीवन दे जायेगी.......

©सुरेंद्रपालसिंह 2015
http://spsinghamaur.blogspot.in/

लौ उम्मीद की मुझे अब, तब दिखती है जिदंगी ज़द्दोज़हद में ही सही, रफ्ता रफ्ता चलती रहती है !!

कलम से _____

लौ उम्मीद की मुझे अब, तब दिखती है
जिदंगी ज़द्दोज़हद में ही सही, रफ्ता रफ्ता चलती रहती है !!

©सुरेंद्रपालसिंह 2015
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