Tuesday, December 30, 2014

खड़े है बीच बाज़ार

कलम से_____
खड़े है बीच बाज़ार
पड़ती है नज़र जिस ओर
लगी हुई सेल
चलो हम भी
कुछ खरीद लें
कुछ अपने लिए
कुछ उनके लिए
कुछ दोस्तों के लिए
लेन देन के
इस दौर में
यह सब चलता है
मार्केट भी खरीदारों
की खातिर ही
सजता और सवंरता है
कहाँ खो गए हो यारो
यहाँ सब मिलता है
खरीदार चाहिए
बस एक दिलदार नहीं मिलता है
जो खुद ही बिक गया हो
खरीदार नहीं हो सकता है
बुझे मन के दिये को अब भला
कौन पुनः प्रज्वलित कर सकता है?
//सुरेन्द्रपालसिंह © 2014//
— with Puneet Chowdhary.

तुमने मेरी कलम को आवाज क्या दी

कलम से_____
तुमने मेरी कलम को आवाज क्या दी
जिन्दगी को मेरी इक नई राह मिल गई !!
//सुरेन्द्रपालसिंह © 2014//
— with Puneet Chowdhary.

सब कुछ अपना था जो वो भूल गई।

कलम से_____
शोलों की गरमाहट भी शांत हो गई
अब कहां व जोशेजवानी और रवानी
एक नदिया की धारा सागर में मिल
सब कुछ अपना था जो वो भूल गई।
//सुरेन्द्रपालसिंह © 2014//
— with Puneet Chowdhary.

शाम होते ही धुआं धुआं सा हो जाता है

कलम से____
शाम होते ही
धुआं धुआं सा हो जाता है
कहने को
बहुत कुछ है
जो यह कह जाता है
दिल के किसी कोने में
धुआं धुआं सा आज भी रहता है
पीछे से कोई
झांक कर यह कहता है
भूल न जाना मुझे
मैं भी हूँ यहाँ
बसेरा था, कभी मेरा यहाँ
कैसे भूल जाऊँगा
कोहरे भरी शाम
हाथों में ले हाथ
हम निकल पड़ते थे
अपनों ही से नहीं
सबसे छिपते फिरते थे
चाँदनी में रुखसारों के
पीछे से तुम निहारा करते थे
दिन सुहाने
मंजर रंगीन हुआ करते थे
वो भी क्या दिन थे
कुछ अजीब से
हुआ करते थे
फुर्र से जोड़ा
कबूतर का उड़ पेड के पीछे से
निकल जाता था
चौंकाने
के लिए हमें काफी था
नदी के साज
पर मल्लाह
गीत गाता था
हवा के हर झकोले पर
तेरा बदन मेरी बाहों
में झूल जाता था
तसुब्बरात की परछाइयाँ
उभरतीं थीं
अपनेआप में
न जाने कितनी कहानियाँ
बयां करतीं थीं
दूर बहुत दूर
निकल आये हैं
अंधेरा है बढ चला
चलो वापस चलें हम अपने यहाँ
शुरू हुआ था सफर
चल चलें हम फिर वहाँ।
//सुरेन्द्रपालसिंह © 2014//
— with Puneet Chowdhary.


आने जाने के काबिल कहां हो अब तुम !!!

कलम से_____
मेरे ख्वाबों में आना तो आसां है
मिलने कैसे आओगे आज रात
लगा जो रखी है मेहंदी 
आने जाने के काबिल कहां हो अब तुम !!!
//सुरेन्द्रपालसिंह © 2014//
— with Puneet Chowdhary.

स्कूल का टाइम हो गया

कलम से_____
बस आभी जा
स्कूल का टाइम हो गया
है आज क्रिसमस की छुट्टी से
पहले का दिन
पार्टी टाइम
छुट्टी में भी
मिलेगा होमवर्क
करना है सब आज नोट
इन टीचर्स ने भी
ऐसे ही करी थी अपनी पढ़ाई
सारा काम है बस, हमारे लिए
मेरी क्रिसमस डीयर फ्रेड्सं
N'joy N'joy N'joy...
//सुरेन्द्रपालसिंह © 2014//
— with Puneet Chowdhary.

सुर हैं सरगम के

कलम से____
सुर हैं सरगम के
या है यह कोई और
जो उठा रहा है, मुझे नींद से......
(आज भर के लिए इतना ही, वाकी कल मिलते हैं, न।
शुभ रात्रि। शब्बाखैर। Good night)
//सुरेन्द्रपालसिंह © 2014//
— with Puneet Chowdhary.
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