Tuesday, March 17, 2015

कन्हाई बिन सब सूनो सौ लागे है







असली रंग तो अब आयो है
मौसम ने सारौ खेल बिगाड़ो है
गलियंन में अधिंयारो छायो है
कन्हाई बिन सब सूनो सौ लागे है
©सुरेंद्रपालसिंह 2015

7 comments:

  1. आपकी इस प्रविष्टि् की चर्चा कल शनिवार (21-03-2015) को "नूतनसम्वत्सर आया है" (चर्चा - 1924) पर भी होगी।
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    सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है।
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    भारतीय नववर्ष की
    हार्दिक शुभकामनाओं के साथ...
    सादर...!
    डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

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    1. बहुत बहुत धन्यवाद

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    2. बहुत बहुत धन्यवाद

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  2. सुन्दर पंक्तियाँ

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