Thursday, April 30, 2015

प्रकृति रंग विहीन हो जाएगी,






कलम से ____

28th April, 2015/Kaushambi

प्रकृति रंग विहीन हो जाएगी,
पशु पक्षी त्राहि त्राहि करने को विवश,
झरनों की कल कल शांत हो जाएगी,
मानव विहीन मानवता तब कहाँ जाएगी ।

गीत कोई भ्रमर नहीं गाएगा,
पराग ले कोई तितली रंग न फैलाएगी,
धरा तब जीवन विहीन हो जाएगी ।

रुद्र नारायण को शृष्टि रचियता रूप में आना होगा,
समंपूणॆ धरा को पुनः नये रूप मे सवाँरना होगा ।

©सुरेंद्रपालसिंह 2015
http://spsinghamaur.blogspot.in/

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